
EPF पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 15000 से बढ़कर 25000 हुई वेतन सीमा
EPF पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हुई वेतन सीमा, लाखों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा : केंद्र की मोदी सरकार ने देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने EPFO के तहत अनिवार्य पीएफ सदस्यता की मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। नई व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से लागू हो चुकी है। इस फैसले से उन कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का रास्ता साफ हुआ है, जो अभी तक ₹15,000 की वेतन सीमा अधिक होने के कारण अनिवार्य EPF कवरेज से बाहर थे।
14 साल बाद बढ़ाई गई EPF की वेतन सीमा :
केंद्र सरकार ने EPF की अनिवार्य सदस्यता के लिए निर्धारित वेतन सीमा में लगभग 66.67 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इससे पहले सितंबर 2014 में इस सीमा को बढ़ाकर ₹15,000 प्रतिमाह किया गया था। इसके बाद करीब 12 वर्षों तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।
अब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इस सीमा को ₹25,000 प्रतिमाह कर दिया है। श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 16 सितंबर 2026 को इस फैसले की जानकारी दी थी।
सरकार के अनुसार, इस बदलाव से लगभग 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में लाने की उम्मीद है।
किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा :
नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा उन कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है, जिनकी संबंधित EPF वेतन राशि ₹15,000 से अधिक और ₹25,000 प्रतिमाह तक है।
पहले ₹15,000 से अधिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाले पात्र नए कर्मचारियों को सामान्यतः अनिवार्य EPF सदस्यता के दायरे में नहीं लाया जाता था। अब संशोधित सीमा के तहत पात्र कर्मचारियों को EPF, EPS और EDLI जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
हालांकि, EPF की सदस्यता के नियमों में पहले से सदस्य रहे कर्मचारियों और नए कर्मचारियों की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए प्रत्येक कर्मचारी की पात्रता संबंधित नियमों के आधार पर तय होगी। 
EPF, EPS और EDLI के मिलेंगे फायदे :
सरकार के इस फैसले से पात्र कर्मचारियों को तीन प्रमुख योजनाओं का लाभ मिल सकता है।
EPF (Employees’ Provident Fund): कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान से भविष्य के लिए बचत तैयार होती है। इस राशि पर नियमानुसार ब्याज भी मिलता है।
EPS (Employees’ Pension Scheme): पात्र कर्मचारियों को भविष्य में पेंशन का लाभ मिल सकता है। पेंशन की राशि सेवा अवधि और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।
EDLI (Employees’ Deposit Linked Insurance): नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में पात्र परिवार को बीमा लाभ मिलता है।
इस प्रकार नई वेतन सीमा से अधिक कर्मचारियों को भविष्य की बचत, पेंशन और बीमा सुरक्षा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
क्या कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी कम होगी :
EPF की वेतन सीमा बढ़ने का असर कर्मचारियों की मासिक सैलरी पर भी पड़ सकता है। जिन कर्मचारियों का पीएफ योगदान पहले ₹15,000 की सीमा के आधार पर किया जा रहा था, उनके लिए नई व्यवस्था के तहत लागू वेतन के आधार पर योगदान बढ़ सकता है।
EPF में सामान्यतः कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ओर से 12 प्रतिशत योगदान किया जाता है। हालांकि, नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPS में जाता है और शेष EPF में जमा होता है।
ऐसे में कर्मचारी के हिस्से का योगदान बढ़ने पर उसकी हाथ में मिलने वाली सैलरी कुछ कम हो सकती है, लेकिन दूसरी ओर उसके पीएफ खाते में अधिक राशि जमा होगी। इससे लंबे समय में रिटायरमेंट फंड बनाने में मदद मिल सकती है।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला :
पिछले कई वर्षों में कर्मचारियों के वेतन और जीवन-यापन की लागत में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद EPF की अनिवार्य सदस्यता के लिए वेतन सीमा लंबे समय तक ₹15,000 बनी हुई थी।
ऐसे में सरकार ने अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के उद्देश्य से इस सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है।
श्रम मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन तथा बीमा सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।
EPF की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करना नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे खासकर ₹15,000 से ₹25,000 के बीच संबंधित वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा। हालांकि, कर्मचारियों को अपनी सदस्यता और पीएफ योगदान की सही जानकारी के लिए नियोक्ता या EPFO के आधिकारिक पोर्टल से जानकारी लेनी चाहिए।







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