
‘अदालत नहीं, लोग करेंगे फैसला’, ज्ञानेश कुमार को लेकर सौरव दास का बड़ा बयान
सौरव दास का भाजपा और चुनाव आयोग पर हमला, बोले- सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती : कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि सत्ता हमेशा के लिए नहीं होती। सरकार को सत्ता जनता की सेवा करने के लिए मिलती है, न कि मनमानी करने के लिए।
सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त की कथित गैर-कानूनी कार्रवाइयों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तब भाजपा का पूरा सिस्टम इतिहास का पाठ पढ़ाने में जुट जाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो सरकार सत्ता को स्थायी समझने लगती है, उसका अंत करीब आने लगता है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिकाओं पर क्या बोले सौरव दास :
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में दाखिल हो रही याचिकाओं पर भी सौरव दास ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अदालतों में याचिकाएं दायर करना लोगों का अधिकार है और संवैधानिक संस्थाओं को अपना काम करने देना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। सौरव दास के मुताबिक, जब पिछली बार लोग न्याय की उम्मीद लेकर अदालत पहुंचे थे, तब अदालत का रुख क्या था, इसे भी याद रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से कुछ महीने पहले पश्चिम बंगाल में SIR कराने का रास्ता साफ किया था। वहीं, बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ की टिप्पणी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग इस बार मतदान नहीं कर पाए, वे अगली बार वोट दे सकते हैं।
ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही जनता तय करेगी :
सौरव दास ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अदालतों में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई होनी चाहिए, लेकिन उनकी जवाबदेही तय करने का मामला केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहेगा।
उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही का फैसला जनता करेगी। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में अंतिम ताकत जनता के पास होती है और किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
सौरव दास के इस बयान ने भाजपा, चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।






