
पाकिस्तान सरकार ने देश के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की गंभीर बीमारी को गोपनीय रखने वाले मुंबई के दो पारसी डॉक्टरों को मरणोपरांत सम्मान देने का फैसला किया है। दोनों डॉक्टरों के नाम डॉ. जल रतनजी पटेल और डॉ. जल धायभो-कू बताए गए हैं। उन्हें पाकिस्तान के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान निशान-ए-कायद-ए-आजम के लिए नामित किया गया है।
पाकिस्तान की ओर से 14 अगस्त को जारी सम्मान सूची में इन दोनों डॉक्टरों के नाम शामिल किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, यह सम्मान उन्हें जिन्ना की बीमारी से जुड़ी चिकित्सकीय जानकारी को गोपनीय रखने के लिए दिया जा रहा है।
1946 में डॉक्टरों ने किया था जिन्ना का मेडिकल परीक्षण :
इतिहास से जुड़े विवरणों के अनुसार, 1946 में इन दोनों डॉक्टरों ने जिन्ना की मेडिकल जांच की थी। उनकी एक्स-रे रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टरों को उनकी बीमारी की गंभीरता का अंदाजा हो गया था।
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जिन्ना उस समय टीबी की गंभीर अवस्था से जूझ रहे थे और उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी। डॉक्टरों ने इस जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया और इसे पेशेवर गोपनीयता के तहत रखा।

जिन्ना की बीमारी को रखा गया था बेहद गोपनीय
जिन्ना की खराब सेहत के बारे में जानकारी उनके करीबी लोगों के एक सीमित दायरे तक ही थी। इतिहासकारों और विभिन्न पुस्तकों में भी इस बात का उल्लेख मिलता है कि उनकी बीमारी को राजनीतिक कारणों से सार्वजनिक नहीं किया गया था।
उस समय जिन्ना की सेहत से जुड़ी जानकारी सामने आने पर भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन की राजनीतिक प्रक्रिया पर संभावित असर को लेकर इतिहास में अलग-अलग दावे किए गए हैं।
माउंटबेटन और विभाजन को लेकर क्या है दावा :
कुछ ऐतिहासिक विवरणों में यह दावा किया गया है कि अगर ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को जिन्ना की गंभीर बीमारी की पूरी जानकारी होती, तो वे विभाजन की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टालने पर विचार कर सकते थे।
पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने भी डॉक्टरों को सम्मानित करने की घोषणा करते हुए कहा कि जिन्ना की बीमारी की जानकारी उस समय सामने आने पर 1947 में पाकिस्तान के गठन की परिस्थितियां प्रभावित हो सकती थीं। यह एक ऐतिहासिक व्याख्या है, जिस पर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं।
कौन थे दोनों डॉक्टर :
सम्मान के लिए नामित दोनों डॉक्टर मुंबई के पारसी समुदाय से थे। डॉ. जल रतनजी पटेल चिकित्सक थे, जबकि डॉ. जल धायभो-कू रेडियोलॉजिस्ट के रूप में जिन्ना के इलाज से जुड़े थे। दोनों ने जिन्ना की बीमारी से संबंधित महत्वपूर्ण चिकित्सकीय जानकारी को गोपनीय रखा था।
पाकिस्तान दिवस पर दिया जाएगा सम्मान :
पाकिस्तान में नागरिक सम्मानों की घोषणा आम तौर पर 14 अगस्त को की जाती है, जबकि उनका औपचारिक वितरण पाकिस्तान दिवस यानी 23 मार्च को होने वाले समारोह में किया जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों भारतीय डॉक्टरों को भी इसी समारोह में मरणोपरांत सम्मान दिए जाने की प्रक्रिया है।
जिन्ना का 1948 में हुआ था निधन :
मोहम्मद अली जिन्ना का निधन 11 सितंबर 1948 को हुआ था। पाकिस्तान बनने के करीब एक साल बाद उनकी मृत्यु हुई। उनकी बीमारी और उससे जुड़ी चिकित्सकीय जानकारी आज भी भारत के विभाजन और पाकिस्तान के गठन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।






