
दिल्ली के कूड़े के पहाड़ हटाने की डेडलाइन फिर बढ़ी, इस साल पूरी तरह समाप्त करना मुश्किल
दिल्ली में कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने की योजना एक बार फिर धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। नगर निगम (MCD) ने ओखला लैंडफिल साइट को पूरी तरह साफ करने की समय सीमा तीसरी बार आगे बढ़ा दी है। पहले इसे जुलाई 2026 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था, फिर अक्टूबर और अब दिसंबर 2026 तक का नया समय तय किया गया है। लगातार बढ़ती समय सीमा से संकेत मिल रहे हैं कि दिल्ली के तीनों बड़े लैंडफिल साइटों को इस साल पूरी तरह खत्म करना मुश्किल हो सकता है।
तीनों लैंडफिल साइटों पर लाखों टन कचरा बाकी :
फिलहाल दिल्ली के प्रमुख कूड़े के पहाड़ों में भारी मात्रा में कचरा मौजूद है। भलस्वा लैंडफिल में करीब 18.43 लाख टन, गाजीपुर में 68.90 लाख टन और ओखला लैंडफिल में लगभग 12.29 लाख टन कचरा जमा है।
MCD ने भलस्वा और ओखला लैंडफिल को दिसंबर 2026 तक खत्म करने का लक्ष्य रखा है, जबकि गाजीपुर लैंडफिल को दिसंबर 2027 तक साफ करने की योजना है।
महापौर प्रवेश वाही ने बुधवार को निगमायुक्त संजीव खिरवार के साथ ओखला लैंडफिल साइट का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो सालों में जमा हुए नए कचरे की वजह से समस्या और बढ़ गई है, जिसके चलते समय सीमा को आगे बढ़ाना पड़ा।

मॉनसून में बढ़ सकती है परेशानी :
अधिकारियों के मुताबिक जुलाई-अगस्त के मॉनसून सीजन में गीले कचरे के कारण कचरे के निस्तारण और प्रोसेसिंग की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
पुराने कचरे को हटाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन दूसरी तरफ रोजाना आने वाला नया कचरा चुनौती बढ़ा रहा है। दिल्ली में हर दिन करीब 12,500 टन कचरा पैदा होता है, जिसमें से लगभग 4,858 टन कचरे का पूरी तरह निपटारा नहीं हो पा रहा है।
नए कचरा निस्तारण प्लांटों में देरी :
MCD ने अक्टूबर 2026 तक पांच नए कचरा निस्तारण प्लांट शुरू करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन मॉनसून और अन्य वजहों से इन परियोजनाओं के समय पर पूरा होने को लेकर सवाल बने हुए हैं।
योजना के तहत ओखला और तेहखंड वेस्ट टू एनर्जी प्लांटों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बवाना और भलस्वा में भी नए प्लांट लगाने की तैयारी है।
सरकार और MCD की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल :
वेस्ट टू एनर्जी परियोजनाएं पहले से ही तय समय से करीब दो साल पीछे चल रही हैं। वहीं, स्थायी समिति के गठन में देरी ने भी कई योजनाओं की गति को प्रभावित किया है।
MCD का दावा है कि 23 एकड़ जमीन को पहले ही कूड़े से मुक्त किया जा चुका है, लेकिन जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों ने जताई चिंता
महापौर प्रवेश वाही ने भरोसा जताया है कि तय समय के भीतर लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नए कचरे के उत्पादन और प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों को पूरी तरह खत्म करना बड़ी चुनौती बना रहेगा।






