
पीएम मोदी का ‘धुरंधर’ फिल्म विवाद पर विपक्ष को जवाब : “झूठ फैलाने की राजनीति बंद हो”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर उठे विवाद पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल लगातार ऐसी फिल्मों और विषयों को निशाना बनाते हैं जो देश की सच्चाई और महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाती हैं।
भारत की राजनीति में फिल्मों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल ही में फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर जमकर निशाना साधा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज कुछ राजनीतिक दल फिल्मों के माध्यम से दिखाए जा रहे सच को स्वीकार करने के बजाय उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने खास तौर पर कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह बार-बार ऐसी फिल्मों को निशाना बनाती है जो समाज में घटित वास्तविक घटनाओं या संवेदनशील मुद्दों को उजागर करती हैं।

फिल्म ‘धुरंधर’ विवाद क्या है :
इस विवाद की जड़ फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चल रही बहस है। कुछ वर्गों का मानना है कि यह फिल्म सामाजिक और राजनीतिक सच्चाइयों को उजागर करती है, जबकि विरोधी इसे एकतरफा या एजेंडा आधारित फिल्म बता रहे हैं। इसी मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि जब “कश्मीर फाइल्स” और “केरल स्टोरी” जैसी फिल्में रिलीज हुई थीं, तब भी विपक्ष ने उन्हें गलत और राजनीतिक एजेंडा बताया था। अब ‘धुरंधर’ को लेकर भी वही रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक बहस को कमजोर करती है और जनता को भ्रमित करने का प्रयास करती है।
विपक्ष पर गंभीर आरोप :
पीएम मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष का एक वर्ग लगातार “झूठ और भ्रम की राजनीति” कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिल्मों को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना केवल एक राजनीतिक रणनीति बन चुकी है, जिसका उद्देश्य सरकार और समाज में चल रहे सकारात्मक संवाद को प्रभावित करना है।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष को सच्चाई से डर लगता है, इसलिए वह फिल्मों पर हमला करता है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पीएम मोदी के बयान को राजनीतिक हमला बताते हुए कहा कि सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान देती है।
फिल्मों और राजनीति का पुराना रिश्ता :
भारत में फिल्मों और राजनीति का संबंध लंबे समय से संवेदनशील रहा है। जब भी कोई फिल्म किसी सामाजिक, ऐतिहासिक या राजनीतिक मुद्दे को उठाती है, तो उस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। हाल के वर्षों में यह प्रवृत्ति और अधिक बढ़ी है, जिससे कई फिल्में राजनीतिक बहस के केंद्र में आ जाती हैं।
राजनीतिक असर :
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘धुरंधर’ फिल्म विवाद केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन गया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर और भी बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।






