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आमंत्रण और निमंत्रण में अंतर नहीं जानते होंगे आप, जानिए हिंदी में इन्वाइट करने लिए क्यों इस्तेमाल होते है ये दो शब्द

आपने अक्सर देखा होगा कि जब हम किसी को अपने घर इन्वाइट करते है या किसी समारोह में बुलाते है तो अक्सर आमंत्रण और निमंत्रण इन दो शब्दों का इस्तेमाल करते है। मगर इन दो शब्दों में क्या अंतर है ये बहुत कम लोग ही जानते होंगे। जी हां आमंत्रण और निमंत्रण में अंतर क्या है ये शायद आपको भी नहीं पता होगा और हैरानी की बात ये है कि किसी को इन्वाइट करने के लिए हिंदी के इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इन दोनों शब्दों में काफी अंतर है और आज हम आपको इन शब्दों के बीच के अंतर के बारे में विस्तार से बताना चाहते है। यानि आज हम आपको बताएंगे कि निमंत्रण का इस्तेमाल कहां होता है और आमंत्रण का इस्तेमाल कहां होता है।

आमंत्रण और निमंत्रण में अंतर यहां जानिए :

गौरतलब है कि आमतौर पर आमंत्रण और निमंत्रण का इस्तेमाल बुलावे के रूप में किया जाता है, लेकिन इन दोनों शब्दों का अर्थ अलग अलग होता है। यही वजह है कि ऋषि मुनियों ने आमंत्रण शब्द के बाद निमंत्रण शब्द का अनुसंधान किया और यहां हमें ये बताने की जरूरत नहीं कि हिंदी में किसी भी शब्द के प्रचलन से पहले उस पर काफी रिसर्च की जाती है।

अब अगर हम दोनों शब्दों के बीच के अंतर की बात करे तो आमंत्रण किसी विषय विशेष पर विशेष व्यक्ति का बुलावा होता है, जब कि निमंत्रण किसी अवसर विशेष पर विशेष व्यक्तियों का बुलावा होता है। जी हां आमंत्रण में लक्ष्य निर्धारित होता है और लक्ष्य प्राप्त होते ही आमंत्रण खत्म हो जाता है, जब कि निमंत्रण में लक्ष्य के साथ लोकाचार भी होता है और लक्ष्य प्राप्ति के बाद उत्सव होता है। जिसमें मंच पर वक्ता को बुलाया जाता है और कार्यक्रम में श्रोता को आमंत्रित किया जाता है। बहरहाल मीटिंग, सेमिनार, समाज सेवा के कार्य, कला तथा संस्कृति के आयोजनों में लोगों को आमंत्रित किया जाता है।

आमंत्रण और निमंत्रण शब्दों का इस्तेमाल होता है ऐसे :

अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो आमंत्रण से व्यक्ति की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई होती है। जब कि निमंत्रण में शारीरिक उपस्थिति उपयोगी है और निमंत्रण में एक आयोजन होता है, जिसमें हर व्यक्ति का लक्ष्य निर्धारित नहीं होता। जी हां निमंत्रण में आयोजन पूरा होने के बाद भोजन आदि सब करके उत्सव मनाया जाता है।

बता दे कि निमंत्रण सामाजिक मेल मिलाप के लिए होता है और निमंत्रण भारत में लोकाचार का एक उपकरण है। जो लोग नहीं जानते उन्हें हम बताना चाहते है कि विवाह समारोह में निमंत्रण दिया जाता है और धार्मिक आयोजनों में भी निमंत्रण दिया जाता है। इसके इलावा पारिवारिक कार्यक्रमों में भी निमंत्रण दिया जाता है। वैसे अब तो आप समझ गए होंगे कि निमंत्रण और आमंत्रण में क्या फर्क होता है और इन दोनों शब्दों का अर्थ भी अलग अलग होता है।

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