
महिलाओं को डिलीवरी के बाद रेस्ट करना है बहुत जरूरी, जानिए ऐसा रेस्ट ना करने के नुकसान
यह बात तो लगभग हर कोई कहता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को पर्याप्त आराम करना चाहिए, ताकि गर्भ में पल रहे शिशु का विकास ठीक तरह से हो और माँ का स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहे। लेकिन उतना ही जरूरी यह समझना है कि डिलीवरी के बाद भी महिलाओं को भरपूर रेस्ट की आवश्यकता होती है।
प्रसव के तुरंत बाद महिला का शरीर बेहद कमजोर हो जाता है, क्योंकि उसने 9 महीने तक बच्चे को संभाला होता है और डिलीवरी के दौरान बहुत ऊर्जा खर्च होती है। ऐसे में अगर नई माँ को आराम नहीं मिलता, तो इसका असर उसकी सेहत पर गहरा पड़ सकता है। शरीर की कमजोरी बढ़ सकती है, रिकवरी धीमी हो सकती है, दूध का उत्पादन कम हो सकता है और इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसलिए डिलीवरी के बाद रेस्ट करना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि हर महिला के लिए बेहद आवश्यक है। उचित आराम से शरीर जल्दी ठीक होता है, मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और शिशु की देखभाल भी आसानी से हो पाती है। इसी वजह से परिवार और आसपास के लोगों का साथ और सहयोग इस समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।
डिलीवरी के बाद रेस्ट ना करने के नुकसान

थकान का बढ़ना :
अगर महिलाएं डिलीवरी के बाद प्रॉपर रेस्ट नहीं करती हैं, तो वे थकान और कमजोरी से भर जाती हैं। आपको बता दें कि डिलीवरी के दौरान महिलाओं का शरीर काफी एक्जॉस्टेड हो जाता है। ऐसे में अगर वे रेस्ट नहीं करेगी, तो यह थकान और कमजोरी क्रॉनिक हो सकती है। ऐसे में महिलाओं की इम्यूनिटी भी सही तरह से काम नहीं करती है, जिसकी वजह से वे बार-बार बीमार पड़ सकती हैं।
रिकवरी में देरी :
डिलीवरी के बाद रेस्ट इसलिए भी जरूरी है, ताकि महिलाएं सही तरह से रिकवरी कर सकें। ध्यान रखें कि रेस्ट नहीं करने से शरीर की हीलिंग पॉवर कमजोर हो जाती है। ऐसे में टांकों की रिकवरी नहीं होती है और एक समय बाद वहां इंफेक्शन होने का रिस्क भी बढ़ जाता है। विशेषकर, जिन महिलाओं की सी-सेक्शन डिलीवरी हुई है, उन्हें रेस्ट करने में जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहए।
जटिलताओं का रिस्क :
क्या आप जानते हैं कि डिलीवरी के बाद यदि महिलाएँ पर्याप्त आराम नहीं करतीं, तो उनका शरीर वैसा रिस्पॉन्ड नहीं कर पाता जैसा उसे करना चाहिए। सामान्यतः प्रसव के बाद शरीर में मिल्क डक्ट सक्रिय हो जाते हैं ताकि शिशु को पर्याप्त मात्रा में दूध मिल सके। लेकिन जब महिलाओं को ठीक से रेस्ट नहीं मिलता, तो दूध के उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है, जो शिशु के पोषण और सेहत के लिए ठीक नहीं है। इतना ही नहीं, थकान और कमजोरी के कारण इंफेक्शन का जोखिम भी बढ़ जाता है, जिससे रिकवरी और धीमी हो सकती है।
पोस्टपार्टम लक्षणों में बढ़ोत्तरी :
डिलीवरी के बाद कई महिलाओं में पोस्टपार्टम डिप्रेशन देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण यह है कि प्रसव के बाद शरीर और मन दोनों ही बड़े बदलावों से गुजरते हैं, जिससे फिजिकल, इमोशनल और मेंटल स्ट्रेस बढ़ जाता है। यदि इस समय महिलाओं को पर्याप्त आराम, सही देखभाल और भावनात्मक सपोर्ट न मिले, तो रिकवरी धीमी हो सकती है और पोस्टपार्टम डिप्रेशन या उससे जुड़ी समस्याएँ लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। यह स्थिति न केवल माँ के लिए चुनौतीपूर्ण होती है, बल्कि शिशु के स्वास्थ्य और उसके विकास को भी प्रभावित कर सकती है।
डिलीवरी के बाद महिलाओं को पर्याप्त आराम की अत्यंत आवश्यकता होती है। यदि उन्हें ठीक से रेस्ट नहीं मिलता, तो उनकी रिकवरी धीमी हो सकती है, दूध का उत्पादन कम होने लगता है और वे पोस्टपार्टम डिप्रेशन का भी सामना कर सकती हैं। इसलिए ज़रूरी है कि इस समय उन्हें परिवार का पूरा सहयोग मिले, डॉक्टर की नियमित निगरानी में उपचार हो और आराम करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।






