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इस कश्मीरी लड़की रुकसाना को हर महीने पढ़ाई लिए पैसे भेजते हैं शहीद कैप्टन थापर के पिता, जानिए क्या है वजह

आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे है जिसे सुनकर आपको वाकई में काफी हैरानी होगी. वर्ष 1999 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में रहने वाली 6 वर्षीय रुकसाना की आंखों के सामने आ’तंकवादियों ने उसके पिता की ह’त्या कर दी। इस घटना के बाद रुकसाना सदमे में चली गई थी। उसने अपनी आवाज भी गंवा दी। फिर जो हुआ…

कश्मीर की इस लड़की रुकसाना के पिता की जिस वर्ष ह’त्या हुई, उसी वर्ष भारतीय सेना अधिकारी कैप्टन विजयंत थापर को जम्मू-कश्मीर राइ-फल्स की बटालियन के साथ जिले में तैनात किया गया था। जब कैप्टन थापर को रुकसाना की कहानी के बारे में पता चला तो वे हर दिन उससे मिलने उसके स्कूल जाने लगे। अपने सहायक जगमाल सिंह के साथ वे मिठाई और चॉकलेट लाते और इस बच्ची से बात करते। धीरे-धीरे दोनों के बीच एक प्यारा-सा रिश्ता बन गया था। कैप्टन थापर रुकसाना को डॉक्टर के पास भी लेकर गए।

भारतीय सेना के कैप्टन थापर के प्रयासों से रुकसाना अपने पिता की मौ’त के सदमे से उबरने लगी और उसने बोलना भी शुरू कर दिया था। लेकिन दुर्भाग्यवश, उसी साल जून में कारगिल के यु,द्ध के दौरान टोलोलिंग नोल की लड़ाई में बहादुर कप्तान थापर शहीद हो गए। हालांकि, मिशन पर जाने से पहले उन्होंने अपने परिवार को खत लिखा कि वे हमेशा रुकसाना का ध्यान रखें। उन्होंने खत में अपने और रुकसाना के प्यारभरे रिश्ते का जिक्र किया और अपने परिवार से गुजारिश की कि वे हर महीने रुकसाना के लिए पैसे भेजें।

बहादुर कैप्टन थापर के पिता कर्नल थापर (73 वर्षीय) ने एक अग्रेजी अखबार को बताया कि उनका परिवार नोएडा में रहता है। लेकिन अपने बेटे की इच्छा का मान रखते हुए वे हमेशा रुकसाना के सम्पर्क में रहे। वे हर साल रुकसाना के लिए पैसे भेजते हैं। साल 2015 में कर्नल थापर रुकसाना और उसकी मां से भी मिले और उन्हें ख़ुशी हुई कि रुकसाना की पढ़ाई जारी है।

टोलोलिंग हमले से पहले अपने परिवार के लिए लिखे खत में उन्होंने लिखा कि यदि फिर से उनका जन्म इंसान के रूप में हो तो वे फिर एक बार सेना में भर्ती होकर देश के लिए लड़ेंगें। उन्होंने अपने परिवार को उनके सभी अंग दान करने की भी गुजारिश की और आग्रह किया कि वे हमेशा रुकसाना का ख्याल रखें। जहां कैप्टन थापर ने अपना बलिदान दिया, उस स्थान पर उनके पिता कर्नल थापर ने कई दौरे किये हैं। वे उन्हें बहुत याद करते हैं और साथ ही उन्हें गर्व है अपने बेटे पर। कैप्टन थापर को मरणो,परांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। आज भी कप्तान लोगो के दिलो में अमर है. जय हिन्द जय हिन्द की सेना।

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