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आठ मिनट में गाना लिख देते थे आनंद बक्शी, लगभग पुराने गाने है इनकी ही देन है

Anand Bakshi Biography : अगर हम बॉलीवुड के सबसे प्रसिद्ध और बेहतरीन गीतकार की बात करे तो उसमें आनंद बख्शी जी का नाम हमेशा शामिल रहेगा। जिनका नाम करीब चालीस बार फिल्मफेयर अवार्ड के लिए दर्ज किया जा चुका है। बता दे कि आनंद बख्शी जी ने कुमार सानु, अलका याग्निक और मन्ना डे नाजाने कितने ही प्रसिद्ध गायकों के लिए गीतों की रचना की है। ऐसे में आपको ये बात जान कर जरा भी हैरानी नहीं होगी कि जहाँ एक गीत के लिए दूसरे गीतकार करीब आठ दिन का समय लेते थे, वही आनंद बख्शी उस काम को आठ मिनट में खत्म कर देते थे।

Anand Bakshi Biography

एक गीत के लिए

गीतकार बनने से पहले आनंद बख्शी करते थे ये काम :

गौरतलब है कि बख्शी साहब का जन्म इक्कीस जुलाई को रावलपिंडी में हुआ था और वह गीतकार के साथ साथ एक गायक भी बनना चाहते थे। यही वजह है कि अपना सपना पूरा करने के लिए वह चौदह साल की उम्र में मुंबई आ गए। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें सफलता नहीं मिली और ऐसी स्थिति में पहले उन्होंने नौसेना और फिर सेना में काम किया था। इसके बाद साल 1958 में आनंद बख्शी जी को पहला ब्रेक भगवान दादा की फिल्म भला आदमी में मिला। जिसमें उन्होंने करीब चार गाने लिखे थे और तब वह फिल्म तो नहीं चली लेकिन बख्शी साहब के गीतकार बनने की गाडी जरूर चल पड़ी।

एक गीत के लिए

इस तरह बदली थी आनंद बख्शी की किस्मत :

बता दे कि आनंद बख्शी जी की किस्मत साल 1965 में पूरी तरह से बदल गई, जब उनके हाथ दो फ़िल्में लगी और उसके बाद तो बख्शी साहब के गाने हर किसी की जुबान पर गूंजने लगे। यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि आनंद बख्शी जी ने चार हजार से भी ज्यादा गीत लिखे है और एक इंटरव्यू के दौरान खुद प्रसिद्ध संगीतकार लक्ष्मीकांत जी ने कहा था कि जहाँ एक गाने के लिए बाकी गीतकार आठ दिन का समय लगाते है, वही काम आनंद बख्शी जी आठ मिनट में कर देते है।

एक गीत के लिए

आनंद बख्शी को थी सिगरेट पीने की बुरी आदत :

बता दे कि उदित नारायण से लेकर कविता कृष्णमूर्ति जी तक सब का पहला गीत आनंद बख्शी जी ने ही लिखा था, इसलिए आनंद बख्शी जी को चार बार फिल्मफेयर अवार्ड भी मिल चुका है।हालांकि आनंद बख्शी साहब को सिगरेट पीने की काफी बुरी आदत थी और इसी वजह से उन्हें फेफड़ों तथा दिल की तकलीफ भी होने लगी थी। बहरहाल तीस मार्च साल 2002 को 72 साल की उम्र में उनका नि’धन हो गया और वह हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए। मगर इसमें कोई शक नहीं कि आम आदमी की भावनाओं को जुबान देने वाले इस प्रसिद्ध गीतकार का नाम हमेशा अमर रहेगा।

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