
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर : फायदे, सेवन का सही तरीका और जरूरी सावधानियां
प्रेग्नेंसी का तीसरा तिमाही (थर्ड ट्राइमेस्टर) मां और शिशु दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे का तेजी से विकास होता है और मां के शरीर में भी कई तरह के शारीरिक व हार्मोनल बदलाव आते हैं। ऐसे में संतुलित और पोषक आहार की जरूरत और भी बढ़ जाती है। भारतीय परंपरा में केसर (Saffron) को गर्भावस्था के दौरान खास माना जाता है, लेकिन इसका सेवन सही तरीके और सीमित मात्रा में करना बेहद जरूरी है।

केसर क्या है और क्यों है खास :
केसर एक कीमती मसाला है, जो क्रोकस सैटाइवस नामक फूल से प्राप्त होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, केसर शरीर को ऊर्जा देने और मानसिक शांति बनाए रखने में मदद करता है।
तीसरी तिमाही में केसर के फायदे :
तीसरी तिमाही में केसर का सीमित सेवन कई तरह से लाभकारी माना जाता है:
- मूड स्विंग्स में राहत: इस समय हार्मोनल बदलावों के कारण तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। केसर मूड को बेहतर करने में सहायक हो सकता है।
- बेहतर पाचन: केसर पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है, जिससे कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है।
- नींद में सुधार: हल्के रूप में केसर लेने से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।
- त्वचा की देखभाल: माना जाता है कि केसर रक्त संचार को बेहतर बनाकर त्वचा को हेल्दी रखने में मदद करता है।
केसर सेवन का सही तरीका :
एक्सपर्ट्स के अनुसार, केसर का सेवन बहुत सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। सामान्य तौर पर:
- 1 से 2 केसर की पतली किस्में (धागे) पर्याप्त होती हैं।
- केसर को रात में एक गिलास गुनगुने दूध में भिगो दें और सुबह दूध पी लें।
- इसे रोज नहीं, बल्कि हफ्ते में 2–3 बार ही लें।
ध्यान रखें कि केसर कभी भी सीधे या अधिक मात्रा में न लें, क्योंकि ज्यादा सेवन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है।

किन बातों का रखें विशेष ध्यान :
- केसर शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें।
- अगर पहले से हाई ब्लड प्रेशर, एलर्जी या कोई अन्य मेडिकल कंडीशन है, तो बिना सलाह के केसर न लें।
- बाजार से शुद्ध और अच्छी गुणवत्ता वाला केसर ही खरीदें।
निष्कर्ष :
प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर को डाइट में सही तरीके और सीमित मात्रा में शामिल किया जाए, तो यह मां के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, हर गर्भवती महिला की जरूरतें अलग होती हैं, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित और सही कदम है।






