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बेहतरीन गाने लिखने वाले गीतकार हसरत जयपुरी के दिल में आखिर कौन सा दर्द था

अगर हम फिल्मों के पुराने दौर की बात करे तो उस जमाने में फिल्मों का संगीत बहुत मधुर हुआ करता था। जी हां शब्दों के नाम पर कुछ भी जोड़ कर नहीं लिखा जाता था, बल्कि मन की हालत को शब्दों में पिरो कर गाया जाता था। हालांकि आज समय काफी बदल चुका है और आज कल तो हर कोई गायक बना हुआ है। वैसे आप सब को वो गाना तो याद ही होगा कि दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, काहे तो तूने दुनिया बनाई, बहरहाल ये गाना तीसरी कसम फिल्म का है और इसे मुकेश साहब द्वारा गाया गया है। मगर इस संगीत को बेहतरीन गाने लिखने वाले शायर हसरत जयपुरी जी ने लिखा है।

बेहतरीन गाने लिखने वाले शायर

बेहतरीन गाने लिखने वाले शायर हसरत जयपुरी की कहानी :

बता दे कि हसरत जयपुरी जी अपने दौर के ऐसे शायर थे जो रात को औरत बना देते थे और उसको सितारों में लपेट देते थे। जी हां जिस तरह से रात को बिखरे तारों को आसमान में देखना सुकून भरा लगता है, कुछ ऐसी ही हसरत जी की शायरी होती थी। यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि हसरत जयपुरी जी हिंदी फिल्मों के टाइटल सॉन्ग लिखने में काफी माहिर थे। अगर हम उनके लिखे हुए गानों की बात करे तो दिल एक मंदिर, दीवाना, तेरे घर के सामने, एन इवनिंग इन पेरिस तथा रात और दिन आदि सब फिल्मों के टाइटल सॉन्ग जयपुरी जी द्वारा ही लिखे गए है। इसके इलावा बाहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है, इस गाने के लिए तो हसरत साहब को बेस्ट लिरिक्स का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला था।

आखिर कौन सा दर्द था हसरत जयपुरी के मन में :

अब यूँ तो ये गाना काफी पुराना है, लेकिन वर्तमान समय में भी लोग इस गाने को सुनना काफी पसंद करते है और कुछ लोग तो अपनी प्रेमिकाओं के लिए ये गाना गाते भी है। इसके साथ ही आजा सनम मधुर चांदनी में हम तुम मिले, तो वीराने में भी आ जाएगी बहार ये गाना भी हसरत जी ने लिखा था। इस गाने को सुनने के बाद ऐसा लगता है जैसे हसरत जी का रात और चांदनी से काफी गहरा नाता था। ऐसे में हम आपको हसरत जयपुरी जी के जीवन से जुड़ा एक किस्सा बताना चाहते है, जो आपको भी काफी दिलचस्प लगेगा।

बचपन में इस लड़की से करते थे बेहद इश्क :

बेहतरीन गाने लिखने वाले शायर

दरअसल ऐसा कहा जाता है कि हसरत जी बचपन में किसी से बेहद प्यार करते थे और उस लड़की का नाम राधा था। मगर तब धर्म को लेकर काफी वाद विवाद होता था और यही वजह है कि तब हसरत साहब का इश्क़ पूरा न हो सका, लेकिन वो कहते है न कि बचपन का इश्क़ भुलाएं नहीं भूलता। ये मन में किसी कोने बारीक कांच के टुकड़े की तरह चुभता ही रहता है। अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो जो शब्द प्रेम पत्र के द्वारा अपनी महबूबा से कहना चाहते थे, वो शब्द जयपुरी जी ने गानों के द्वारा लिख डाले। तो ये है बेहतरीन गाने लिखने वाले शायर हसरत जयपुरी जी के अधूरे इश्क़ की कहानी, जो कभी पूरी न हो सकी।

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