स्वास्थ्य

Slip Discs Problems : क्या है स्लिप डिस्क की समस्या, जानिए क्या है इसके कारण और उपचार के आसान उपाय

Slip Discs Problem And Treament In Hindi : इसमें कोई शक नहीं कि वर्तमान समय में बहुत से लोग कमर दर्द की समस्या से परेशान है और कई लोग इसे सामान्य दर्द समझ कर नजरअंदाज भी कर देते है। जब कि यह दर्द स्लिप डिस्क का पहला संकेत हो सकता है। इसलिए इस दर्द को कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए। हालांकि स्लिप डिस्क की समस्या ज्यादातर बुजुर्गों में ही देखने को मिलती है, लेकिन आज कल ये समस्या युवाओं को भी होने लगी है। ऐसे में सही समय पर स्लिप डिस्क की समस्या का इलाज करना जरूरी है। तो चलिए अब आपको इस बारे में सब कुछ विस्तार से बताते है।

Slip Discs Problem And Treament In Hindi

कमर दर्द की समस्या से है परेशान तो अपनाएं ये तरीके :

सबसे पहले हम आपको ये बताना चाहते है कि आखिर स्लिप डिस्क क्या है। जी हां हमारे शरीर की रीढ़ की हड्डी चब्बीस हड्डियों से बनी होती है, जिन्हें कशेरुकाएं कहते है और इन वेर्टेब्रे के बीच में जेली जैसे पदार्थ से भरे सॉफ्ट लचीले डिस्क पैड होते है जो हड्डियों को जोड़ने के साथ साथ उन्हें लचीला तथा अपनी जगह बनाएं रखने में मदद कर सकते है। बहरहाल इन डिस्क पैड्स के दो भाग होते है और इनमें आंतरिक भाग जेल जैसा होता है तथा दूसरा भाग आउटर रिंग होता है।

बता दे कि कई बार चोट लगने या कमजोरी के कारण ये डिस्क पैड अपनी जगह से खिसक जाते है तो इसे ही स्लिप डिस्क या हर्निएटेड डिस्क कहते है। इसके इलावा अगर स्लिप डिस्क के कारण कोई स्पाइनल नर्व दब जाएं तो तेज दर्द या सुन्नपन जैसी समस्या भी हो सकती है। अब अगर हम स्लिप डिस्क के लक्षण की बात करे तो वो कुछ इस प्रकार है।

स्लिप डिस्क के लक्षण :

बता दे कि स्लिप डिस्क में दर्द ज्यादातर शरीर के एक तरफ ही होता है और चोट के स्थान के आधार पर लक्षण अलग अलग हो सकते है।

बता दे कि स्लिप डिस्क की समस्या पीठ के निचले हिस्से में होने से पैर, कूल्हे या नितंब के एक हिस्से में तेज दर्द हो सकता है। इसके इलावा शरीर के दूसरे हिस्सों में सुन्नपन की समस्या महसूस हो सकती है। जी हां जिस तरफ दर्द महसूस हो रहा हो उस तरफ  के पैर में कमजोरी महसूस हो सकती है।

बता दे कि गर्दन में स्लिप डिस्क की समस्या होने पर गर्दन को हिलाने से दर्द महसूस हो सकता है। इसके इलावा कंधे के ब्लेड के पास या उसके ऊपर गहरा दर्द हो सकता है। केवल इतना ही नहीं इसके साथ ही यह दर्द आपकी बांह, कलाई और उंगलियों तक भी जा सकता है। जी हां व्यक्ति को अपने कंधे, कोहनी, कलाई और उंगलियों में सुन्नपन की समस्या भी महसूस हो सकती है।

बता दे कि खड़े होने या बैठने के बाद दर्द या चोट वाले हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है। जी हां कई बार यह दर्द धीरे धीरे और कई बार काफी तेज गति से शुरू हो सकता है।

वही छींकते, खांसते या हंसते समय भी प्रभावी स्थान पर दर्द हो सकता है और पीछे की तरफ झुकते या कुछ दूर चलने से भी दर्द महसूस हो सकता है।

गौरतलब है कि सांस खिंचते या रोकते समय या मल त्याग करते समय भी दर्द महसूस हो सकता है। बता दे कि कुछ मांसपेशियों में कमजोरी भी हो सकती है और इस बात को व्यक्ति तब नोटिस करता है, जब डॉक्टर जांच करते है। जी हां कुछ मामलों में व्यक्ति को अपने पैर या हाथ को उठाने, एक तरफ अपने पैर की उंगलियों पर खड़े होने, अपने एक हाथ से कस कर निचोड़ने या अन्य समस्याओं में भी मुश्किल हो सकती है।

स्लिप डिस्क के कारण :

गौरतलब है कि स्लिप डिस्क के कई कारण हो सकते है, जैसे कि स्पाइनल डिस्क से जेल का रिसाव होना और बढ़ती उम्र के कारण स्पाइनल डिस्क का लोच कम होना।

इसके इलावा किसी भारी चीज को उठाना, किसी तरह का एक्सीडेंट होना या चोट लगना और शरीर का वजन ज्यादा होना आदि। बहरहाल पीठ के निचले हिस्से का बार बार झुकना, लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठे रहना या बिगड़ी हुई जीवनशैली और धूम्रपान करना आदि कारण हो सकते है।

बता दे कि स्लिप डिस्क की समस्या से निजात पाने के लिए पहले इसके लक्षणों को पहचानना जरूरी है और ऐसे में इससे जुड़ी जानकारी के बारे में पता होना जरूरी है। तो चलिए अब आपको इसके बारे में सब कुछ विस्तार से बताते है।

पूछताछ करके लक्षण जानना :

गौरतलब है कि सबसे पहले डॉक्टर मरीज से उसके दर्द के लक्षणों के बारे में जानकारी ले सकते है और मरीज से उसकी मेडिकल हिस्ट्री भी पूछ सकते है। जी हां स्लिप डिस्क के लक्षण सुन्नता या अहसास के बारे में भी पूछ सकते है। इसके साथ ही मरीज की जीवनशैली और उसकी आदतों के बारे में भी पूछ सकते है। इसके बाद मरीज का शारीरिक परीक्षण हो सकता है।

बता दे कि डॉक्टर आपकी मांसपेशियों की मजबूती और उनकी प्रतिक्रियाओं का परीक्षण कर सकते है तथा बैठने, खड़े होने या चलने के लिए भी कह सकते है। इसके साथ ही आगे पीछे, दाएं और बाएं झुकने के लिए भी कह सकते है और गर्दन को आगे, पीछे, दाएं या बाएं झुकने की सलाह भी दे सकते है। यहां तक कि रोगी को कंधे, कोहनी या कलाई तथा हाथ को उठाने के लिए भी कह सकते है।

इसके इलावा आपको बिठा कर पैर को ऊपर उठाने के लिए भी कह सकते है और अगर इस स्थिति में आपके पैरों में दर्द महसूस हो तो ये कमर के निचले हिस्से में स्लिप डिस्क का संकेत हो सकता है। जी हां डॉक्टर आपको सिर को आगे झुकाने के लिए भी कह सकते है और इस दौरान डॉक्टर सिर को हल्का आगे की तरफ दबाएंगे। बहरहाल ऐसे में दर्द का बढ़ना या सुन्नता महसूस होना गर्दन में स्लिप डिस्क का संकेत हो सकता है।

सीटी स्कैन और एमआरआई के आधार पर :

बता दे कि शारीरिक परीक्षण के आधार पर डॉक्टर आपको प्रभावित जगह का एमआरआई या सीटी स्कैन करवाने की सलाह दे सकते है और इस टेस्ट से स्लिप डिस्क के स्थान पर शरीर की तंत्रिका किस तरह से प्रभावित हो रही है इसकी पुष्टि हो सकती है।

एक्स रे :

बता दे कि रीढ़ की हड्डी की गुणवत्ता जांचने और पीठ दर्द की समस्या किन वजहों से हो रही है इसकी जानकारी हासिल करने के लिए डॉक्टर एक्स रे करवाने की सलाह दे सकते है।

इलेक्ट्रोमायोग्राफी टेस्ट :

बता दे कि डॉक्टर आपको यह टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते है और यह टेस्ट मांसपेशियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए किया जाता है और इस टेस्ट में रोगी की प्रभावित मांसपेशियों में सेंसर इलेक्ट्रोड, जो कि मॉनिटर से जुड़ा हुआ होता है, उसमें सुई को डाल कर तंत्रिकाओं में इसके संचार को मापा जाता है। बहरहाल टेस्ट के दौरान बिजली के हल्के झटके भी लगाए जा सकते है।

नर्व कंडक्शन स्टडी :

बता दे कि स्लिप डिस्क की गम्भीरता को जानने के लिए यह टेस्ट किया जा सकता है और यह टेस्ट इलेक्ट्रोमायोग्राफी टेस्ट के साथ भी किया जा सकता है। इसमें इलेक्ट्रोड नामक चिपकने वाले पैच का उपयोग किया जाता है और इन्हें प्रभावित हिस्से पर लगा कर नर्व में होने वाले बदलाव को ग्राफ के द्वारा देखा जा सकता है।

स्लिप डिस्क का इलाज :

फिजियोथेरेपी या आराम :

बता दे कि यदि स्लिप डिस्क की समस्या गंभीर न हो तो शुरुआत के समय में डॉक्टर आराम करने की या कुछ मामलों में एक्सपर्ट की देखरेख में फिजियोथेरेपी जैसे कुछ व्यायाम करने की सलाह दे सकते है। ऐसे में अगर आप इन उपचारों का सही तरीके से पालन करेंगे तो जल्दी ठीक भी हो सकते है तथा फिर से सामान्य गतिविधियां करने योग्य हो सकते है।

दवाइयां :

बता दे कि डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां जैसे कि दर्द निवारक दवाइयां, नसों को आराम पहुंचाने वाली या मांसपेशियों को आराम देने और ऐंठन को कम करने वाली दवाइयां लेने का सुझाव दे सकते है।

जीवनशैली में बदलाव :

वही अगर किसी का वजन अधिक है और इस वजह से उसे स्लिप डिस्क की समस्या है तो स्लिप डिस्क या इससे होने वाले पीठ दर्द में सुधार के लिए डाइट और व्यायाम से जुड़े सुझाव दे सकते है। इस दौरान मरीज को ठीक से उठना, बैठना, कपड़े पहनना, चलना और कई गतिविधियां सही तरीके से सिखा सकते है। जी हां इस दौरान वे मांसपेशियों को मजबूत करना सिखाएंगे ताकि रीढ़ को सहारा मिल सके। इसके साथ ही मरीज को रीढ़ और पैरों में लचीलापन कैसे बढ़ाया जाएं ये भी सिखाएंगे।

इंजेक्शन :

बता दे कि कई मामलों में जब दवा से असर न हो तो डॉक्टर स्टेरॉयड इंजेक्शन के द्वारा भी इलाज कर सकते है। जी हां यह कई महीनों तक दर्द को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। ये इंजेक्शन स्पाइनल नर्व और डिस्क के आसपास की सूजन को कम करने में मदद करते है और कई लक्षणों से राहत दिलाते है। हालांकि हो सकता है कि कुछ महीनों बाद दोबारा दर्द होने लगे।

मसाज :

गौरतलब है कि डॉक्टर की सलाह से एक्सपर्ट द्वारा हल्की फुल्की मालिश की सलाह भी दी जा सकती है और इससे मांसपेशियों को आराम मिल सकता है। इस दौरान ध्यान रखे कि मसाज जोर से न करे और अगर थोड़ी सी भी असुविधा हो तो मालिश तुरंत बंद कर दे।

ठंडा या गर्म सेंक :

बता दे कि गर्म पानी का सेंक या गुनगुने पानी से नहाना भी स्लिप डिस्क की हल्की फुल्की परेशानी में काफी लाभकारी साबित होता है। इससे मांसपेशियों को आराम मिल सकता है और ठंडे पानी या बर्फ की सेंक से राहत भी मिल सकती है। जी हां ठंडा सेंक प्रभावित नस को आराम दे सकता है।

सर्जरी :

बता दे कि अगर इन सब के बाद भी लक्षण कम न हो तो सर्जरी भी एक बढ़िया विकल्प है और खास करके अगर स्लिप डिस्क की समस्या छह हफ्तों से ज्यादा से हो तो प्रभावित नस पर दबाव को कम करने के लिए सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। इसके इलावा जब मूत्राशय या आंत ठीक से काम करना बंद कर दे तथा मांसपेशियां भी काफी कमजोर हो जाएं तो भी सर्जरी की जा सकती है।

गौरतलब है कि स्लिप डिस्क के दर्द को कम करने के लिए कई तरह के आसन या योग किए जा सकते है। जैसे कि मकरासन, शवासन, भुजंगासन और शलभासन आदि सब आसन लाभकारी होते है।

Doctor Meeting

स्लिप डिस्क से बचाव के उपाय :

बता दे स्लिप डिस्क से बचने के लिए इन बातों का खास ध्यान रखे। जैसे कि शरीर का वजन ज्यादा न बढ़ने दे, क्योंकि इससे पीठ के निचले हिस्से पर दबाव कम पड़ सकता है।

इसके इलावा पीठ तथा पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए व्यायाम करे और ध्यान रखे कि विशेषज्ञ की देखरेख में ही योग या एक्सरसाइज करे। बहरहाल बैठने की स्थिति का ध्यान रखे और वजन उठाने के लिए सही तकनीक का उपयोग करे।

बता दे कि धूम्रपान और शराब के सेवन से दूरी बनाएं रखे और सही डाइट ले। इसके साथ ही ज्यादा फैट या कैलोरी युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन न करे।

स्लिप डिस्क के दौरान इन बातों का रखे ध्यान :

यहां गौर करने वाली बात ये है कि अगर कमर में लगातार दर्द हो रहा हो तो इस समस्या से निजात पाने के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लीजिए। यहां तक कि योग या व्यायाम करने से पहले भी डॉक्टर से विचार विमर्श जरूर करे।

गौरतलब है कि जब किसी व्यक्ति को स्लिप डिस्क की समस्या होती है तो उस व्यक्ति को कमर, गर्दन या अन्य प्रभावी जगहों पर दर्द की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही ध्यान रखे कि स्लिप डिस्क की समस्या खुद ठीक नहीं हो सकती, बल्कि इसे ठीक करने के लिए उचित उपचार की जरूरत पड़ती है।

बता दे कि स्लिप डिस्क में साइकिल नहीं चलानी चाहिए, क्योंकि इस समस्या में झुकने या शरीर पर दबाव देने पर तेज दर्द उत्पन्न हो सकता है। हालांकि अगर आप स्लिप डिस्क होने के बावजूद भी साइकिल चलाना चाहते है तो इससे पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लीजिए। दोस्तों हमें उम्मीद है कि आपको स्वास्थ्य संबंधी ये जानकारी जरुर पसंद आई होगी।

Disclaimer : विभिन्स माध्यमों से संग्रहित कर ये जानकारी आप तक पहुंचाई गई हैं। Indian News Room इसके लिए जिम्मेदार नहीं है और न ही इसकी सत्यता और प्रमाणिकता का दावा करता है। कोई भी उपाय करने से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

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