खबरें

भारत वापिस लौटी रीना छिब्बर, पाकिस्तान में रही नौ दिनों तक और बताया कैसा था वहां के लोगों का बर्ताव  

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली रीना छिब्बर वर्मा हाल ही में पाकिस्तान के रावलपिंडी के अपने पुश्तैनी घर का दौरा करके वापिस भारत लौटी है। जी हां वह वाघा बॉर्डर का दौरा करते हुए भारत पहुंची थी और रीना की आखिरी इच्छा रावलपिंडी में अपने घर जाने की थी, जो अब पूरी हो चुकी है। बहरहाल भारत वापिस लौटी रीना छिब्बर का दिल अभी भी रावलपिंडी में ही है और वह भारत वापिस जरूर आ गई है, लेकिन उन्हें अपने घर की भी काफी याद आ रही है। वही भारत पहुंचने के बाद उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उन्हें काफी अच्छा लग रहा है, क्योंकि वह करीब 75 साल बाद रावलपिंडी गई थी और वहां उन्हें इतना प्यार मिला कि वह बता नहीं सकती।

नौ दिनों बाद भारत वापिस लौटी रीना छिब्बर :

जी हां रीना ने कहा कि उनके पास अपनी खुशी जाहिर करने के लिए शब्द नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनके साथ पहले कभी का हुआ होगा। जी हां रीना ने बताया कि वह अपने पुश्तैनी घर के उसी कमरे में एक रात सोई थी, जहां वह बचपन में सोया करती थी। इसके इलावा उन्होंने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में उम्मीद से ज्यादा प्यार मिला है और उनकी एक बार अपना घर देखने की इच्छा भी पूरी हो गई। वह हमेशा कहती आई है कि उनका होमटाउन रावलपिंडी है।

ऐसे में जब उन्होंने 75 साल बाद दोबारा अपना घर देखा तो उनकी पुरानी यादें ताजा हो गई। जी हां रीना ने कहा कि वह जब तक वहां रही अपने परिवार को याद करती रही। इसके इलावा यहां जो मेरी मेहमान नवाजी की गई, उसके लिए मैं सब का तहे दिल से शुक्रिया करती हूं। बता दे कि रीना ने कहा कि उन्होंने दोनों मुल्कों की सरकारों से वीजा व्यवस्था में ढील बरतने की गुहार लगाते हुए कहा मैं दोनों मुल्कों से बस यही कहना चाहूंगी कि बंटवारे का दंश झेल रहे नब्बे साल से अधिक उम्र के लोगों को एक दूसरे के यहां आना जाना आसान किया जाएं, ताकि वे अपने उस घर को देख सके, जो वे बंटवारे के बाद छोड़ कर आ गए थे।

पाकिस्तान के लोगों ने उन्हें दिया खूब प्यार :

इसके बाद रीना ने कहा कि अगर उन्हें दोबारा मौका मिला तो वह दोबारा रावलपिंडी जरूर जाना चाहेंगी। बता दे कि रीना करीब नौ दिनों तक पाकिस्तान में रही थी और उन्होंने अपने पुश्तैनी घर का दौरा भी किया। इस दौरान पाकिस्तान के लोगों ने उन्हें खूब प्यार दिया और रावलपिंडी में अपने घर पहुंचने के बाद उनका ढोल नगाड़ों से स्वागत भी किया गया था। यहां तक कि उस घर के प्रति रीना का लगाव देखते हुए वहां रह रहे लोगों ने उन्हें रात को वही रहने का न्यौता भी दिया। ऐसे में रीना का उसी घर में रात को रुकने का इंतजाम किया गया और उन्हें अपने बचपन वाले कमरे में सोने का मौका भी मिला।

जी हां पंद्रह साल की उम्र तक रीना उसी कमरे में सोती थी और इस कमरे के दरवाजे पर घर वालों ने रीना के नाम की नेमप्लेट भी लगा दी, जिस पर रीनाज होम यानि रीना का घर लिखा था। बता दे कि वह इस यात्रा के आखिरी पड़ाव पर लाहौर भी पहुंची थी और उन्होंने लाहौर के फॉर्मैन क्रिश्चियन कॉलेज का दौरा भी किया था और इस कॉलेज में पहुंच कर वह भावुक हो गई थी, वो इसलिए क्योंकि उनके पति ने 1945 में इसी कॉलेज में पढ़ाई की थी। जी हां उन्होंने पाकिस्तान के लोकप्रिय पर्यटन स्थल मरी का रुख भी किया था, क्योंकि इस जगह से रीना की काफी यादें जुड़ी हुई है।

अपने पुश्तैनी घर से जुड़ी हुई है रीना छिब्बर की कई यादें :

बहरहाल रीना बचपन में अपने परिवार के साथ मरी जाया करती थी। गौरतलब है कि रीना पंद्रह साल की उम्र में अपने परिवार के साथ मई से जुलाई 1947 में भारत पहुंची थी और उस समय सांप्रदायिक दंगे भड़के हुए थे। ऐसे में रीना का कहना है कि वह अपने पुश्तैनी घर, अपने पड़ोस और पिंडी की गलियों की यादें कभी नहीं मिटा पाई। बता दे कि फेसबुक पर इंडिया पाकिस्तान हेरिटेज क्लब की मुहिम से रीना छिब्बर वर्मा आखिरकार अपनी जन्मभूमि पाकिस्तान पहुंची थी और इससे पहले वह दो बार पाकिस्तान जाने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन इस बार उन्हें सफलता मिल ही गई। फिलहाल भारत वापिस लौटी रीना छिब्बर भारत वापिस आने के बाद काफी खुश है।

यह भी पढ़ें : ‘हर हर शंभू’ गाकर सुर्खियों में आईं फरमानी नाज, बेटे की खातिर बनी सिंगर, जानिए फरमानी ने ‘हर-हर शंभू’ गाना क्यों गाया

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button