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दृष्टि कोचिंग की नीवं रखें वाले डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय, जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातों के बारे में विस्तार से

Dr Vikas Divyakirti Biography In Hindi : आज हम एक ऐसी शख्सियत के बारे में बात करने जा रहे है जिसने आईएएस ऑफिसर जैसी सम्मानजनक पद वाली जॉब को छोड़ कर एक अध्यापक और लेखक बनने का फैसला किया। जी हां ये शख्स पहले आईएएस ऑफिसर था, लेकिन फिर भी इन्होंने इतने बड़े कार्यरत को छोड़ कर अपनी मर्जी से जिंदगी जीने का फैसला किया। बहरहाल हम यहां किसी और की नहीं बल्कि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की बात कर रहे है और आज हम आपको न केवल डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय बताएंगे बल्कि उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातों से भी रूबरू करवाएंगे। तो चलिए अब आपको इस बारे में सब कुछ विस्तार से बताते है।

Dr Vikas Divyakirti Biography In Hindi

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय है ये:

गौरतलब है कि विकास दिव्यकीर्ति का जन्म 1973 में हरियाणा में हुआ था। वह एक हिंदू परिवार से ताल्लुक रखते है और उन्होंने यूएससी की शिक्षा हासिल की है। वही अगर हम डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के जीवन से जुड़ी बातों के बारे में चर्चा करे तो वह भारत के जाने माने आईएएस कोचिंग के संस्थापक और एक लेखक है तथा उन्होंने आईएएस की तैयारी करने के लिए काफी मुश्किलों का भी सामना किया है। जी हां इतनी कठिन मेहनत करने के बाद ही वह एक प्रसिद्ध आईएएस ऑफिसर बने थे।

यहां गौर करने वाली बात ये है कि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति इतनी ज्यादा योग्यता रखते है कि वह मात्र एक से दो महीने के अंदर ही किसी भी छात्र को आईएएस ऑफिसर बनने की ट्रेनिंग दे सकते है, क्योंकि वह आईएएस की तैयारी से पूरी तरह वाकिफ है। अगर हम सीधे शब्दों में कहे तो वह अपने छात्रों को भी अपनी ही तरह आईएएस ऑफिसर बनने में सक्षम बनाते है। आपको जान कर हैरानी होगी कि विकास दिव्यकीर्ती जी ने अपने फर्स्ट अटेम्प्ट में ही आईएएस मेंस की परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया था। यहां तक कि इनके द्वारा पढ़ाए गए कई छात्र ऐसे है जो आईएस पीसीएस जैसी पोस्ट पर काम करते है। ऐसे में बच्चों के भविष्य के प्रति चिंता जताते हुए उन्होंने बच्चों को पढ़ाने का फैसला किया और ये भी कहा कि अगर आईएएस, पीसीएस या फिर आईपीएस अधिकारी में कोई खास बात हो तो मैं बनूं।

जी हां वर्तमान समय में वह एक अध्यापक और लेखक है। हालांकि उन्हें आईएएस ऑफिसर के रूप में चुना गया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस जॉब से इस्तीफा दे दिया था। वैसे यहां हैरानी की बात ये है कि सम्पूर्ण भारत वर्ष में आईएएस ऑफिसर की जॉब को सबसे ऊंचे पद की और सबसे कठिन जॉब माना जाता है। ऐसे में इस जॉब को डॉक्टर विकास दिव्यकीर्त ने प्राप्त किया और इसे छोड़ भी दिया, जिसके कारण वर्तमान समय में उन्हें तथा उनके फैसले को लेकर खूब चर्चा हो रही है।

माता पिता बनाना चाहते थे पॉलिटिशियन :

बता दे कि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति खुद को पढ़ाई की तरफ अग्रसर करना चाहते थे, जब कि उनके माता पिता उन्हें पॉलिटिशियन बनाना चाहते थे। यही वजह है कि उन्होंने अपने कॉलेज के समय में कुछ पॉलिटिशियन पार्टी की तरफ से इलेक्शन भी लड़े थे। मगर फिर उनके दोस्तों के साथ कुछ ऐसी बुरी घटनाएं हुई, जिसके बाद उन्होंने पॉलिटिक्स से अपना नाता तोड लिया। अब अगर हम उनके निजी जीवन की बात करे तो उनके तीन भाई है और इनके माता पिता भी स्कूल टीचर रह चुके है। जी हां इनके पिता हरियाणा के रोहतक में स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक एफिलिएटिड कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर रह चुके है और इनकी माता जी भी हरियाणा के ही इंटर लेवल के स्कूल की लेक्चरर रह चुकी है।

गौरतलब है कि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति बचपन से ही पढ़ाई लिखाई में काफी निपुण थे और उन्होंने अपने तीनों भाइयों के साथ हरियाणा के भिवानी शहर के एक स्कूल में बारहवीं तक की परीक्षा हासिल की है। बहरहाल भिवानी के ही एक स्कूल में उनकी माता जी भी हिंदी की अध्यापिका थी। जी हां इनके माता पिता हिंदी साहित्य से ही है। वही इन्होंने अपनी स्कूल की शिक्षा विद्या भारती के विद्यालय से हासिल की है, जहां बाल संसद होती थी। जिसमें वह न केवल सक्रिय रहते थे बल्कि जीतते भी थे। बता दे कि स्कूल पूरा करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास के विषय से बीए की डिग्री भी हासिल की है और फिर उन्होंने अपना विषय बदल कर हिंदी साहित्य में एम.ए. तथा एम. फिल की पढ़ाई पूरी की।

बहरहाल ये सब पूरा करने के बाद उन्होंने हिंदी विषय से ही पीएचडी की शिक्षा भी पूरी कर ली और फिर बाद में समाजशास्त्र तथा जनसंचार विषयों में एमए की डिग्री भी हासिल की। बता दे कि अपनी पढ़ाई को जारी रखते हुए उन्होंने एलएलबी की डिग्री भी हासिल की तथा हिंदी साहित्य विषय से यू. जी. सी., जे.आर.एफ. और समाजशास्त्र से नेट की परीक्षा को पास किया। यहां तक कि उन्होंने दिल्ली के विश्वविद्यालय से और भारतीय विद्या भवन दोनों संस्थाओं से अंग्रेजी हिंदी अनुवाद में डिप्लोमा भी हासिल किया है। जी हां डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी में अपना एडमिशन करवाया और दिल्ली यूनिवर्सिटी में उनका एडमिशन करवाने का मुख्य उद्देश्य पॉलिटिक्स में आना था।

इस तरह की थी बच्चों को पढ़ाने की शुरुआत :

बहरहाल अपने दोस्तों के साथ मिल कर उन्होंने जाकिर हुसैन कॉलेज में अपना एडमिशन करवा लिया था और एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि हमें अपने दोस्तों की दोस्ती निभानी थी, इसलिए हम भी जाकिर हुसैन कॉलेज में चले गए। हालांकि जब हमने एडमिशन करवाया था तब इलेक्शन का बोलबाला नहीं था, लेकिन ऐसे में भी उन्होंने अपना प्रभाव दिखाते हुए लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचना शुरू कर दिया। तभी तो मात्र सोलह वर्ष की उम्र में वह जाकिर हुसैन कॉलेज में काफी प्रसिद्ध हो गए थे।

जी हां सोलह वर्ष की उम्र में ही उन्होंने सड़कों पर हो रहे आंदोलनों में प्रमुख हिस्सेदारी निभाई और इस दौरान उन्होंने पुलिस की मार भी सहन की। जब कि उनके आसपास के लोग उनसे ये कहा करते थे कि वे आईएएस बनेंगे। जिसके बाद उन्होंने सोचा कि अब वे आईएएस ही बनेंगे और फिर उन्होंने अपना ध्यान आईएएस बनने की तरफ केंद्रित कर दिया। हालांकि शुरुआती समय में उन्हें ये पता नहीं था कि आखिर आईएएस क्या होता है। तो ऐसे में उन्होंने इस विषय पर जानकारी इकट्ठा करना शुरू कर दिया और फिर उन्होंने अपना विषय बदल कर हिस्ट्री कर दिया।

इसके बाद उन्होंने आईएएस की तैयारी पर पूरा ध्यान दिया और पहली बार में ही परीक्षा को भी पास कर लिया। वही अगर हम डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की लव लाइफ की बात करे तो वह एक शादीशुदा व्यक्ति है और उनकी पत्नी का नाम तरुण वर्मा है तथा उनकी पत्नी ने भी पीएचडी की डिग्री हासिल की है। बता दे कि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति अपने प्रारंभिक जीवन को लेकर कभी निराश नहीं हुए और उन्होंने अपने प्रारंभिक जीवन को ही अपनी सफलता तक का आधार माना है। बहरहाल अपनी संपूर्ण शिक्षा पूरी करने के बाद साल 1996 में वह यूपीएससी की परीक्षा में भी बैठे थे, जिसे पास करने के बाद वह आईएएस ऑफिसर बन गए। जी हां वह अपने कॉलेज के टॉपर थे तथा उन्होंने जितने भी एग्जाम दिए, सब को बहुत अच्छे से क्लियर किया।

वर्तमान समय में प्रसिद्ध लेखक और अध्यापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति :

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने चौबीस वर्ष की उम्र से ही बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था और तब उन्होंने बच्चों को सिविल सर्विसेज की तैयारी को लेकर पढ़ाना शुरू किया था। इस बारे में उनका कहना है कि उन्हें कुछ आर्थिक समस्या आ गई थी, जिसके कारण उन्होंने पढ़ाना शुरू कर दिया था। जब कि डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की जॉइनिंग होने में कुछ समय था और इसी वजह से उन्होंने पढ़ाना शुरू किया था। दरअसल वे चाहते थे कि आईएएस बनने से पहले वह अपनी सारी उधारी चुका दे। इसके बाद 1998 में इनके एक स्टूडेंट ने हिंदी साहित्य पढ़ाने की जिद्द की और ऐसे में वह हिंदी साहित्य पढ़ाने लगे। जी हां शुरुआती समय में वह केवल बारह छात्रों को पढ़ाया करते थे।

फिलहाल वर्तमान समय में वह सिविल सर्विसेज के बहुत ही बड़े कोचिंग के कोचिंग संचालक है। यहां तक कि उन्होंने कई छात्रों की भी आगे बढ़ने में काफी मदद की है। केवल इतना ही नहीं इसके इलावा ज्यादा से ज्यादा लोगों को फ्री शिक्षा मिल सके, इसके लिए उन्होंने साल 2017 में दो यूटयूब चैनल भी शुरू किए। इनमें से एक चैनल का नाम दृष्टि आईएएस और दूसरे चैनल का नाम दृष्टि आईएएस इंग्लिश है। बता दे कि इन्होंने साल 1996 में दिव्यकीर्ति कोचिंग सेंटर की स्थापना की थी, जो वर्तमान समय में टॉप 5 कोचिंग सेंटर में से एक है। इसके बाद 2017 में इन्होंने यूट्यूब चैनल खोले, जिस पर कोचिंग के अध्यापकों द्वारा फ्री में सब्सक्राइबर्स को शिक्षा दी जाती है। तो दोस्तों आपको डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय कैसा लगा, इस बारे में हमें अपनी राय जरूर दीजियेगा।

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